CWG 2018: क्या इन मुक्केबाजों का ‘पंच’ भारत को दिलाएगा मेडल?

नई दिल्ली। गोल्ड कोस्ट में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन और कुश्ती के अलावा जिस गेम से भारत को पदक आने की काफी उम्मीद है, वो है मुक्केबाजी। युवा मुक्केबाजों के दम पर भारत इस बार में परचम लहराने की कोशिश करेगा। पुरुष टीम में आठ में से सात मुक्केबाज पहली बार इन खेलों में शिरकत करेंगे। मैरीकोम की अगुआई में चार सदस्यीय महिला टीम भारत के लिए पहली बार मेडल लाने को तैयार है।

पांच बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज एमसी मैरीकोम गोल्ड कोस्ट में भारतीय महिला मुक्केबाजी दल की अगुआई करेंगी। 35 वर्षीय इस मुक्केबाज पर सभी की नजरें हैं क्योंकि वह भारतीय दल की सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। इसके अलावा वह पहली और संभवत: आखिरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करने उतरेंगी। ऐसे में उनकी नजरें हर हाल में पदक जीतने पर होगी। बता दें कि मैरीकोम पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करने जा रही हैं। उन्होंने 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भाग नहीं लिया था। 35 वर्ष की उम्र होने के बावजूद मैरीकोम फिट हैं और शानदार फॉर्म में चल रही हैं। उन्होंने पिछले साल एशियन महिला चैंपिनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता था।

महिलाओं में मैरीकॉम के अलावा, लेशराम सरिता देवी और पिंकी रानी भी पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। ग्लासगो में सरिता देवी गोल्ड जीतने से चूक गई थीं और उन्हें रजत से ही संतोष करना पड़ा था। वहीं पिंकी रानी ने कांस्य जीता था। इस बार ये दोनों मुक्केबाज अपने पदक का रंग बदलना चाहेंगी।

मनोज कुमार के लिए यह आखिरी राष्ट्रमंडल खेल हो सकते हैं
मनोज कुमार के लिए यह आखिरी राष्ट्रमंडल खेल हो सकते हैं

भारतीय पुरुष दल की अगुआई अनुभवी मुक्केबाज मनोज कुमार करेंगे। 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले मनोज के लिए 2014 ग्लास्गो खेल निराशाजनक रहे थे। ग्लास्गो में वह 64 किग्रा वर्ग में खेलने उतरे थे और क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गए। इस बार वह बढ़े हुए वजन 69 किग्रा में शिरकत करेंगे। 31 वर्षीय मनोज के लिए संभवत: यह आखिरी राष्ट्रमंडल खेल हो सकते हैं। हाल ही में उन्होंने दिल्ली में आयोजित इंडिया ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता है। वह स्वर्ण के साथ अपने अभियान का अंत करना चाहेंगे।

भारतीय पुरुष टीम के हाई परफोरमेंस डाइरेक्टर और मुख्य कोच सेंटियागो नीवा को गोल्ड कोस्ट में अपने मुक्केबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। पिछले साल भारतीय मुक्केबाजी से जुड़े सेंटियागो ने कहा, भारतीय मुक्केबाजों के पास काफी अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। वो राष्ट्रमंडल खेलों में काफी पदक जीत सकते हैं। हमने इन खेलों के लिए काफी कड़ी तैयारी की है।

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे ज्यादा 3 स्वर्ण जीते थे
दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे ज्यादा 3 स्वर्ण जीते थे

अब तक कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत ने मुक्केबाजी में कुल 28 पदक जीते हैं। इसमें 5 स्वर्ण, 9 रजत और 14 कांस्य पदक शामिल हैं। 2014 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के खाते में 5 पदक आए थे। इसमें 4 रजत और 1 कांस्य शामिल हैं। वहीं 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने 3 स्वर्ण समेत 7 पदक हासिल किए थे।

मुक्केबाजी राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे पुराने खेलों में से एक हैं। 1903 में आयोजित पहले राष्ट्रमंडल खेलों से पुरुष मुक्केबाजी हमेशा इन खेलों का हिस्सा रही है। इन खेलों में इंग्लैंड और कनाडा का दबदबा रहा है। इंग्लैंड ने 54 स्वर्ण पदकों के साथ सर्वाधिक 118 पदक जीते हैं। कनाडा के नाम 25 स्वर्ण के साथ 82 पदक हैं।

ग्लासगो में पहली बार महिला मुक्केबाजी
राष्ट्रमंडल खेलों में महिला मुक्केबाजी की शुरुआत 2014 ग्लास्गो से हुई। इन खेलों में भारत की महिला मुक्केबाजों के प्रदर्शन को सभी ने सराहा। भारत ने दो पदक एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। लैशराम सरिता देवी को 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की शैली वॉट्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अब दूसरी बार दुनियाभर की महिला मुक्केबाज गोल्ड कोस्ट में अपने मुक्के का दमखम दिखाने उतरेंगी।