राज बब्बर ने भी यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ा

लखनऊ. कांग्रेस के 84वें महाधिवेशन के बाद पार्टी में बदलाव नजर आने लगे हैं। बुधवार को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद से राज बब्बर ने इस्तीफा दे दिया। वे इस्तीफा मंजूर होने तक कामकाज देखते रहेंगे। कांग्रेस में दो दिनों में यह तीसरा इस्तीफा है, इससे पहले गुजरात और गोवा के प्रदेश अध्यक्षों ने भी पद छोड़ चुके हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से तीनों इस्तीफों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई एलान नहीं किया गया है। राहुल गांधी ने महाधिवेशन में कांग्रेस अंदर युवाओं को मौका दिए जाने की बात कही थी। बता दें कि बब्बर लंबे वक्त तक समाजवादी पार्टी में रहने के बाद कांग्रेस में आए थे।

न्यूज एजेंसी ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया कि राज बब्बर ने बुधवार सुबह अपना इस्तीफा पार्टी हाईकमान को भेज दिया। यूपी उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब था। इसलिए कार्यकर्ताओं में बब्बर के खिलाफ नाराजगी दिखाई दे रही थी।

इस्तीफे पर राज बब्बर ने कहा, ”कांग्रेस ने नई व्यवस्था की शुरुआत हो गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी अध्यक्ष जो भी जिम्मेदारी देंगे उसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।” यूपी उपचुनाव में हार के दवाब में इस्तीफे के सवाल पर कहा, ”जो बात आपसे कही है, वही पार्टी अध्यक्ष से बोलूंगा। ऐसी चीजें पहले भी हो रही हैं और आगे भी होंगी।”

सूत्रों के मुताबिक, यूपी कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष कोई ‘ब्राह्मण चेहरा’ होगा। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व सांसद राजेश मिश्र और पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी का नाम चर्चा में है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस यूपी में एक अध्यक्ष और चार उपाध्यक्षों की तैनाती करेगी।

इसके पहले गोवा कांग्रेस अध्यक्ष शांताराम नाइक (71) ने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा, ”मैं पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उस बात से सहमत हूं। चाहता हूं कि अब हम युवाओं के लिए रास्ता बनाएं।” उधर, मंगलवार को गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी के इस्तीफे की भी खबर आई। हालांकि, उन्होंने सीधे पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सोलंकी का इस्तीफा स्वीकार हो सकता है।

राहुल गांधी ने कांग्रेस के हालिया अधिवेशन में कहा था- ”कांग्रेस को बदलना होगा। युवाओं में शक्ति है, उनके और हमारे नेताओं के बीच एक दीवार है। मेरा पहला काम इसे तोड़ना है। हम सीनियर नेताओं का सम्मान रखते हुए इसे तोड़ेंगे। बस आपको चुनाव तक 6-7 महीने बिना झगड़े के एक रहना है। हम दिखाएंगे कि कैसे चुनाव लड़ा जाता है। मैं सरदार पटेल, नेहरू, आजाद, जगजीवन राम के दौर की कांग्रेस देखना चाहता हूं।”