पिछले 4 सालों में पहली बार पासवान ने इशारों-इशारों में बीजेपी की आलोचना की

नीतीश और रामविलास पासवान की बढ़ती करीबी से बीजेपी को संदेश

नई दिल्ली। केंद्र सरकार में सीनियर मंत्री रामविलास पासवान 4 सालों में पहली बार मोदी सरकार में रहते हुए बीजेपी पर अप्रत्यक्ष रूप से दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हैं और उसके अगले दिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार उनकी बातों के समर्थन में आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार यह महज संयोग नहीं था। रामविलास पासवान और नीतीश कुमार की युगलबंदी नये सियासी समीकरण का संकेत है जो बीजेपी को बड़ा संदेश देना चाहती है। दोनों की चिंता बिहार से लेकर दिल्ली तक न सिर्फ उनकी उपेक्षा को लेकर है बल्कि सहयोगी रहते हुए भी उनके राजनीतिक स्पेस में हस्तक्षेप का मुद्दा भी है।

मालूम हो कि सोमवार को नीतीश कुमार ने पटना में कहा था कि वह किसी भी गठबंधन के साथ रहें, लेकिन उनकी मूल अवधारणा में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और समाज को तोड़ने व बांटने वाली नीति से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने इशारों में पिछले कुछ दिनों में बिहार से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के भड़काऊ बयानों पर ऐतराज जताया था। नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उन्होंने बीजेपी से दलित, अल्पसंख्यक के हित के लिए और गंभीरता से सोचने को कहा था।

अभी दोनों दलों का एनडीए से अलग होने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन दोनों दल के नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि बीजेपी ने उन्हें सहयोगी होने का उचित स्थान भी नहीं दिया है। दलित नेता के रूप में स्थापित रामविलास पासवान को पिछले 4 सालों में राजनीतिक रूप से कोई मंच नहीं दिया और दूसरे दलित नेताओं को सामने लाया गया। दूसरी तरफ जिस उत्साह से नीतीश कुमार को आरजेडी से गठबंधन तोड़कर एनडीए में शामिल किया गया, बाद में यहां भी इन्हें हाशिए पर रखने की कोशिश की गई। यही बात रामविलास और नीतीश दोनों को करीब लाने वाला कॉमन फैक्टर बना। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से दोनों लगातार संपर्क में हैं और सियासी घटनाक्रम को लेकर दोनों एक साझा रणनीति पर काम कर रहे हैं।

दोनों की चिंता 2019 में सीटों के हिस्से को लेकर भी है। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार ने बीजेपी नेतृत्व से बार-बार इस बारे में अभी से स्थिति साफ करने का कहा ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं में उलझन न रहे लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। यही स्थिति रामविलास को लेकर है। जेडीयू के एक नेता ने बताया कि अगर नीतीश कुमार और रामविलास पासवान की ताकत को एक साथ जोड़ ले तो वे बिहार में अब भी सियासी समीकरण में सबपर भारी पड़ेंगे। नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान के साथ नजदीकी कर यह भी संदेश दे दिया।

जेडीयू के अनुसार नीतीश कुमार बिहार में एनडीए गठबंधन के बिग ब्रदर बने रहेंगे और अपने गवर्नेंस में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे। इन दोनों मोर्चों पर उन्होंने बीजेपी सहित तमाम दलों को साफ संदेश दिया। इस सवाल पर कि क्या रामविलास पासवान और नीतीश कुमार ममता बनर्जी की ओर प्रस्तावित गैरकांग्रेसी-गैरबीजेपी मोर्चे से भी संपर्क में हैं, दोनों दलों के नेताओं ने साफ इनकार किया और स्पष्ट कहा कि फिलहाल दोनों की मूल मंशा एनडीए में अपनी स्थिति मजबूत करने की है।