मुंबईः आंदोलन खत्म, रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा- पक्षपात रहित है रेलवे रिक्रूटमेंट पॉलिसी

नई दिल्ली. मुंबई रेलवे में नौकरी की मांग को लेकर अप्रैंटिस छात्रों का रेल रोक आंदोनल खत्म हो गया। इस मामले में रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि रेलवे में बड़ी तादाद में भर्ती किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भारतीय रेलवे ने रिक्रूटमेंट पॉलिसी बनाई है जो पक्षपात रहित और पारदर्शी है। फिलहाल अब धीरे-धीरे ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा रहा है। छात्रों के आंदोलन की वजह से लोकल ट्रेनों का परिचालन लगभग चार घंटे तक बाधित रहा था। जहां पर छात्र आंदोलन कर रहे थे वहां पर एक ट्रैक को खाली करा दिया गया है।

इससे पहले, प्रदर्शनकारियों ने रेलवे में स्थायी नौकरी की मांग को लेकर माटुंगा और दादर के बीच ट्रेनी अप्रैंटिंस ने ट्रैक पर जाम लगा दिया था। छात्रों के हंगामे के कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि 20 फीसदी कोटा को हटा दिया जाए और स्थायी नौकरी दे दी जाए। प्रदर्शन के बीच रेलमंत्री पीयूष गोयल थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह पिछले 4 साल से शांतिपूर्ण अपनी मांग को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। हालांकि, सेंट्रल रेलवे ने बयान जारी कर कहा है कि रेलवे अप्रेंटिशिप में ट्रेनिंग का प्रावधान है और नौकरी देने की कोई व्यवस्था नहीं है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। प्रदर्शन के बाद सेंट्रल लाइन पर करीब 30 ट्रेनें रद्द की गई। रेलवे की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, ‘पिछले चार साल से कोई भर्ती नहीं हुई है। हम एक जगह से दूसरी जगह लगातार संघर्ष कर रहे हैं। 10 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। हम ऐसा होने नहीं दे सकते। हम यहां से तब तक नहीं हटेंगे जब तक रेल मंत्री पीयूष गोयल हमसे आकर नहीं मिलते। डीआरएम( मुंबई डिविजन के मंडल रेल प्रबंधक) से किए हमारे सभी अनुरोध अनसुने रहे हैं। माटुंगा और दादर के बीच ट्रेनी अप्रैंटिंस ने ट्रैक पर जाम लगा दिया ।

बताया जा रहा है कि ये अप्रेंटिस स्टूडेंट सालों तक काम कर चुके हैं लेकिन इन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों को कंट्रोल में लाने के मुंबई पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो छात्रों ने इसके जवाब में ट्रेनों पर पर पत्थर फेंके।