नागपुर में RSS की बैठक आज से, कल होगा सरकार्यवाह का चुनाव

नई दिल्ली. नागपुर में शुक्रवार से आरएसएस की तीन दिवसीय अहम बैठक शुरू होगी. इस बैठक में संघ और उससे जुड़े संगठनों के 1500 प्रतिनिधि शामिल होंगे. बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी के संगठन मंत्री राम लाल और बीजेपी महासचिव राम माधव भी मौजूद रहेंगे.

वैसे तो हर साल मार्च के दूसरे सप्ताह के आखिर में प्रतिनिधि सभा की बैठक होती है. लेकिन हर तीसरे साल ये बैठक संघ मुख्यालय नागपुर में होती है. इस बैठक में संघ के 3 वर्षों के कामकाज की रिपोर्टिंग होती है. वहीं अगले तीन साल के लिए एजेंडा एवं भावी कार्ययोजना भी तय की जाती है.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में संगठन की ज़रूरत के हिसाब से संगठनात्मक बदलाव किए जाते हैं. संघ में एक धड़ा चाहता है कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी जाए. लेकिन संघ में दूसरा धड़ा चाहता है कि भैयाजी जोशी के पास ही सरकार्यवाह ज़िम्मेदारी रहने दी जाए.
पिछली बार प्रतिनिधि सभा में भैयाजी जोशी के स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी जगह होसबोले को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा ने ज़ोर पकड़ा था, लेकिन तब भी भैयाजी जोशी को ही सरकार्यवाह की सर्वसम्मति से चुना गया था. तब भैयाजी जोशी ने कहा था कि पिछले कई वर्षों से कह रहा हूं कि अब मेरी उम्र हो गई है. इसलिए युवा पीढ़ी को आगे लाया जाना चाहिए.

सूत्रों की मानें तो संघ के बड़े नेताओं का मानना है कि घुटने के ऑपरेशन के बाद उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है. सरकार्यवाह पर अंतिम फ़ैसला 10 मार्च को होगा. लेकिन इतना तय है कि संघ में संगठनात्मक बदलाव 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखकर किए जाएंगे.

इस बैठक में राम मंदिर मामले में जिस तरह से श्री श्री रविशंकर का हस्तक्षेप बढ़ा है, उस पर भी चर्चा की जाएगी. ट्रिपल तलाक़ और वीएचपी की अंदरूनी लड़ाई पर भी चर्चा होगी. संगठन का विस्तार कैसे हो इस पर भी चर्चा होगी. बैठक में 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए हिंदुओ में जातिगत विसंगतियों को दूर कर संगठित करने का फॉर्मूला दिया जाएगा.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सरकार की उपलब्धियों और पार्टी के कामों की रिपोर्टिंग के साथ पार्टी के विस्तार और राज्यवार जीत का विवरण बैठक में रखेंगे.

संघ इस बैठक में दो प्रस्ताव पास करेगा, जो समसामयिक विषयों पर होगा. इन प्रस्तावों की संरचना 2019 के आम चुनाव के रोडमैप को ध्यान में रखकर की जाएगी. सूत्रों की मानें तो संघ के कुछ संगठन भारतीय मज़दूर संघ, भारतीय किसान संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे कुछ संगठन मोदी सरकार के ख़िलाफ आवाज़ बुलंद कर सकते हैं.
संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में के सूर दर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते सामने आई थी. के सूर दर्शन पद में बड़े ज़रूर थे लेकिन वो उम्र और तजूरबे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता कि अब ऐसी समस्या खड़ी हो.