कार्ति चिदंबरम की कोर्ट में पेशी, सीबीआई ने की रिमांड बढ़ाने की मांग

आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की रिमांड को लेकर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में तीखी बहस जारी है। सीबीआई पूछताछ के लिए कार्ति की 14 दिन की रिमांड चाहती है। कोर्ट में बहस के दौरान सीबीआई ने कुछ गोपनीय दस्तावेज जज के सामने पेश किए और कार्ति की कस्टडी की मांग की। वहीं कार्ति के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध किया। कोर्ट में इस वक्त दोनों पक्षों के बीत तीखी बहस चल रही है। बुधवार को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने एक दिन के रिमांड पर भेजा था। बता दें कि पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश में गैर-वाजिब मंजूरी देने के बदले घूस लेने के आरोप में कार्ति की गिरफ्तारी हुई थी।

कार्ति  के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को जेल भेजने की कोई वजह नहीं है। इस पर ईडी के वकील ने कहा कि कार्ति चिदंबरम जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। वकील ने दलील दी कि कार्ति को रिहा किए जाने पर जांच की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही सीबीआई ने जज के सामने कुछ गोपनीय दस्तावेज भी रखे, जिनके आधार पर किसी बड़ी साजिश की आशंका जाहिर की। सीबीआई ने राजनीतिक दबाव की बात नकारते हुए कहा कि कार्ति के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।

ईडी ने इसके साथ ही कार्ति के सीए की रिहाई का भी विरोध किया। ईडी कार्ति और उनके सीए से एक साथ पूछताछ करना चाहती है। कोर्ट में ईडी के वकील ने कहा कि कार्ति का कहना है कि उनके सीए के पास सारी जानकारियां हैं। उन्होंने कहा कि अगर सीए को छोड़ा गया तो, सबूत मिटाए जा सकते हैं।

कार्ति की पेशी के दौरान कोर्ट में उनके पिता पी. चिदंबरम और मां नलिनी भी मौजूद रहे। कोर्ट में पेशी के लिए जाने के दौरान मीडियाकर्मियों के किसी भी सवाल पर कार्ति ने कोई जवाब नहीं दिया। मौजूद मीडिया ने उनसे राजनीतिक साजिश में फंसाने और जांच में सहयोग नहीं करने को लेकर सवाल पूछे। सवालों पर कार्ति आहिस्ते से कुछ बोलते नजर आए, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।

 

कांग्रेस इस पूरे मामले में बीजेपी पर फंसाने का आरोप लगा रही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि सीबीआई स्वतंत्र संस्था है और अपने तरीके से काम कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कार्ति चिदंबरम केस पर सिर्फ यही कहा कि इस मामले में जांच एजेंसी अपना काम कर रही है।

 

आरोप है कि 2007 में चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये की रकम दिलाने के लिए विदेशी निवेश से जुड़े एफआईपीबी (फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड) की मंजूरी दिलाने और इस कंपनी को जांच से बचाने के लिए कार्ति ने 10 लाख रुपये लिए थे। उस दौरान कंपनी के मालिक इंद्राणी मुखर्जी और पीटर थे। सूत्रों का कहना है कि इंद्राणी ने सीबीआई को बयान दिया है कि कार्ति ने एफआईपीबी क्लीयरेंस के लिए उनसे एक मिलियन डॉलर (6.5 करोड़ रुपये) की मांग की थी।

दूसरी तरफ सीबीआई ने भी इस केस में अपनी तरफ से पूरी तैयारी की है। बता दें कि कार्ति की गिरफ्तारी के लिए भी सीबीआई ने पूरा जाल बुना था। सूत्रों के अनुसार, ‘कार्ति की गिरफ्तारी की बात खुद विभाग के ज्यादातर लोग भी नहीं जानते थे। इसके लिए एक खास टीम ने पूरी तैयारी की। गिरफ्तारी की तैयारी गुपचुप तरीके से इसलिए की गई ताकि किसी सूरत में यह खबर बाहर न निकले और कार्ति के लिए बचने की कोई गुंजाइश भी न रहे।’