PNB केस: नीरव मोदी के घर समेत करीब 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी

नई दिल्‍ली. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में करीब 11,330 करोड़ रुपए फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद गुरुवार को इन्‍फोर्समेंट डायरेक्‍टरेट (ईडी) ने कई जगहों पर छापेमारी की। ईडी ने ज्‍वैलर्स और बिजनेसमैन नीरव मोदी के घर समेत करीब 10 ठिकानों पर रेड की। इनमें सूरत में 4, मुंबई में 4 और दिल्‍ली में 2 ठिकाने शामिल हैं। वहीं, बैंकिंग सेक्‍टर के एनॉलिस्‍ट का कहना है कि इस मामले का दूसरे बैंकों पर भी असर हो सकता है।

 

न्‍यूज एजेंसी के अनुसार, ईडी ने 280 करोड़ रुपए में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह छापेमारी नीरव मोदी और अन्‍य के खिलाफ की है। ऑफिशियल सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 10 जगहों पर एजेंसी ने छापे मारे। इसमें मोदी का कुर्ला स्थित घर, काला घोड़ा की ज्‍वैलरी बुटिक, बांद्रा व परेल में तीन कंपनियों, सूरत में तीन जगह और दिल्‍ली के चाणक्‍यपुरी और डिफेंस कालोनी के शोरूम में छापेमारी की है। बता दें, इस मामल की शुरुआत में पीएनबी की शिकायत पर सीबीआई में दर्ज हुई एफआरआई के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

पंजाब नेशनल बैंक ने इस स्‍कैम में इस्‍तेमाल हुए मॉडस ऑपरेंडी (तौर-तरीकों) के बारे में दूसरे बैंकों को आगाह किया है। पीएनबी ने अगल-अलग बैंकों को लेटर भेजकर कहा, ”शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह संदिग्‍ध फ्रॉड मुंबई में हमारे एक ब्रांच के स्‍टॉफ के साथ मिलकर जालसाजों ने अंजाम दिया है।”

लेटर में कहा गया है, ”इस फ्रॉड को अंजाम देने के लिए पीएनबी के जूनियर लेवल के अफसरों ने ‘स्विफ्ट’ ट्रेल का इस्तेमाल किया और बिना अनुमति नीरव मोदी ग्रुप की कंपनियों की ओर से लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी की।” इस बीच, बैंकिंग सेक्‍टर यूनियन के सूत्रों के अनुसार, मुंबई में पीएनबी के ब्रैडी हाउस ब्रांड में सामने आए इस फ्रॉड में बैंक के एक असिस्‍टेंड जनरल मैनेजर (एजीएम) समेत 22 इम्‍प्‍लॉइज को सस्‍पेंड किया जा चुका है।

करीब 11,330 करोड़ रुपए के पीएनबी फ्रॉड मामले का असर दूसरे बैंकों पर हो सकता है। एंजल ब्रोकिंग के रिसर्च एनॉलिस्‍ट जयकृष्‍ण जे परमार ने बताया कि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि पीएनबी ने इस फ्रॉड को लेकर अपनी बुक में कोई प्रोविजन किया था या नहीं। पीएनबी के अलावा कुछ दूसरे बैंकों पर भी इस फ्रॉड का असर हो सकता है क्‍योंकि उन्‍होंने भी इन क्‍लांट्स को विदेश में लोन दिया है। पीएनबी फ्रॉड के दायरे में गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र जैसी कंपनियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई हैं। वित्त मंत्रालय के फाइनेंशियल सर्विस डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी राजीव कुमार ने बताया कि यह केस डायमंड ज्वेलर नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स से जुड़ा है।

एक पब्लिक सेक्टर के बैंक के एक सीनियर अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘चार बड़े ज्वैलर्स गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी रडार पर हैं। सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) विभिन्न बैंकों के साथ उनके अरेंजमेंट और पैसे के इस्तेमाल की जांच कर रही हैं पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,330 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।

यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे। बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।

कैसे हुआ फ्रॉड?
इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे। पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।

पीएनबी फ्रॉड को कोर बैंकिंग सिस्टम को दरकिनार कर ग्‍लोबल फाइनेंशियल मैसेजिंग सर्विस ‘स्विफ्ट’ का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए अन्य भारतीय बैंकों की विदेश ब्रांचेज को भुगतान के लिए नोट्स जारी किए गए। विदेश में क्रेडिट हासिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘स्विफ्ट’ से जुड़े मेसेज पीएनबी के फिनैकल सॉफ्टवेयर सिस्टम में तुरंत अवेलबल नहीं होते क्योंकि ये बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में एंट्री किए बिना जारी किए जाते हैं।

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