अमेरिका में आर्थिक संकट : पांच साल में दूसरी बार ‘शटडाउन’ हुआ

वाशिंगटन. दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका में बड़ा आर्थिक संकट उठ खड़ा हो गया है। पांच साल में दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने के बाद आशंका जताई जा रही है कि अमरीका दिवालियेपन की ओर बढ़ रहा है या यह भी कहा जा सकता है कि ट्रंप के कारण अमेरिका अर्शव्यवस्था डूब सकती है। सदन ने अल्पकालिक व्यय विधेयक को 197 के मुकाबले 230 वोटों से मंजूरी दे दी। यह विधेयक सरकार को 16 फरवरी तक निधि प्रदान करेगा। दरअसल, यहां एक अहम आर्थिक विधेयक दोनों सदनों से पारित नहीं हो सका, जिस कारण वहां ‘शटडाउन’ की नौबत आ गई है।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सीनेटर्स ने सदन द्वारा पारित फंडिंग बिल को खारिज कर दिया है। इसी बिल के जरिए सरकार को 16 फरवरी तक की फंडिंग सुनिश्चित थी। अमरीकी सरकार आधिकारिक तौर पर बंदी का सामना कर रही है। ‘द हिल’ के मुताबिक बिल को पारित करने के लिए 60 वोटों की जरूरत थी और उस संख्या के मुकाबले 48 सीनेटरों ने बिल के खिलाफ वोटिंग की है। केवल पांच डेमोक्रेटों ने बिल के पक्ष में मतदान किया है। डेमोक्रेट सीनेटर राजनीतिक खतरे का उल्लेख करते हुए स्टॉपगैप स्पेंडिंग पर रोक लगा चुके हैं। इसके बाद शनिवार सुबह कई सरकारी दफ्तर आधिकारिक तौर पर बंद रहे।
अमेरिका में एंटीडेफिशिएंसी एक्ट लागू है। इस एक्ट के तहत अमरीका में पैसे की कमी होने पर संघीय एजेंसियों को अपना कामकाज रोकना पड़ता है, यानि उन्हें छुट्टी पर भेज दिया जाता है। इस दौरान उन्हें सैलरी नहीं दी जाती। इसे सरकारी भाषा में शटडाउन कहा जाता है।
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि मौजूदा समय में व्हाइट हाउस में 1, 715 स्टाफ हैं। शटडाउन के बाद इसकी संख्या 1000 की जाएगी। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप को अलग से सपोर्टर दिए जाएंगे, ताकि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन ठीक तरह से कर सकें
आर्थिक संकट के बाद ट्रंप प्रशासन न्याय विभाग से स्टाफ कम कर सकता है। मौजूदा वक्त में अमेरिकी न्याय विभाग 1 लाख 15 हजार स्टाफ हैं। फिलहाल 95 हजार स्टाफ से ही काम चलाया जाएगा। कई जजों और वकीलों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है।
शटडाउन के बाद भी नेशनल पार्क, लाइब्रेरी, लिंकन मेमोरियल और स्मिथसनियन म्यूजियम खुले रहेंगे। 2013 में हुए शटडाउन में अमेरिकी सरकार ने इन्हें अस्थायी तौर पर बंद रखा था। ऐसे में सरकार को काफी नुकसान हुआ था।
अमरिकी शटडाउन का असर व्यक्ति की उन चीजों और सुविधाओं पर भी पड़ेगा, जिसका इस्तेमाल वे रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं. इसमें पेट्रोल, ग्रोसरी भी शामिल है।
अगर सीनेट में ये बिल पास नहीं हुआ, तो मार्केट पॉलिसिंग सिक्योरिटीज़ और एक्सचेंज कमीशन के स्टाफ के एक हिस्से को भी बिना सैलरी छुट्टी पर भेजा जा सकता है। हालांकि, यूएस सेंटर की ओर से चलाए जा रहे डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) प्रोग्राम जरूर प्रभावित हुआ थ। ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, इस बार भी कोशिश रहेगी कि यह सेक्टर प्रभावित न हो। फिर भी स्टाफ को आने वाले समय के लिए तैयार रहने का कहा गया है। (एजेंसी)