कुमार विश्वास का केजरीवाल पर हमला, कहा-मान लिए होते मेरी बात तो ये सब नहीं देखना पड़ता

नई दिल्ली। ‘आप’ के 20 विधायकों की सदस्यता रद किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उस वक्त मेरी मानी होती तो पार्टी को यह दिन शायद कभी नहीं देखना पड़ता। उन्होंने साफ कहा कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति मामले में मैंने केजरीवाल को मना किया था। कुमार ने कहा कि हमें आप विधायकों की सदस्यता खत्म होने का दुख है। क्योंकि इस जीत के लिए हम लोगों ने बहुत मेहनत किया था।
राज्यसभा नहीं भेजे जाने से नाराज कुमार विश्वास ने भी शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने का एक और मौका हाथ लगा है। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद केजरीवाल की परेशानी और बढ़ा दी है। कुमार ने मुख्यमंत्री व उनके सहयोगियों पर पहले भी कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इससे उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, अभी पार्टी ने कुमार के इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया है। लेकिन पार्टी के अंदर चल रही अंदरुनी लड़ाई तेज होने की आशंका प्रबल हो गई है। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद पार्टी अंदर और बाहर दोनों ओर से घिरी नजर आ रही है।
उधर, चुनाव आयोग के फैसले पर विपक्ष ने पैनी नजर बनाए रखी है। भाजपा व कांग्रेस इस ताक में है कि इससे दोनों दलों को अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इसे लेकर दोनों पाटिर्यां बेहद उत्साहित हैं।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली विधानसभा उपचुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी थी। संसदीय सचिव बनाए गए विधायकों को अयोग्य करार दिलाने को लेकर चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक संघर्ष किया है। उपचुनाव की तैयारी भी उन्होंने कई महीने पहले से शुरू कर दी है।
भाजपा भी उपचुनाव को लेकर उत्साहित है। राजौरी गार्डन उपचुनाव और नगर निगमों के चुनाव में मिली भारी जीत से भाजपा नेता भी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि जिस तरह से आप सरकार ने दिल्लीवासियों से वादाखिलाफी की है उससे लोगों में भारी रोष है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार है। इसका लाभ उसे उपचुनाव में मिलेगा।
लाभ के पद मामले में फंसे आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित करने की सिफारिश राष्ट्रपति महोदय से की है। अब सबकी नजरें राष्ट्रपति पर हैं, जो इस मामले पर अंतिम मुहर लगाएंगे। अगर राष्ट्रपति आप के विधायकों के विरुद्ध फैसला देते हैं, तो केजरीवाल के विधायकों की संख्या 66 से 46 रह जाएगी।