रिपोर्ट में खुलासा : बचत बढ़ाने में कामयाब हुई प्रधानमंत्री जनधन योजना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अपने बैंक खाते खोलने वाले लोग अब ज्यादा बचत कर रहे हैं। यह दावा स्टेट बैंक आॅफ इंडिया की इकॉनमिक रिसर्च विंग ने किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खाता खोलने वाले लोगों ने शराब और तंबाकू जैसी चीजों की खरीद पर भी कमी की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ग्रामीण इलाकों में मुद्रास्फीति भी धीमी हो सकती है। जिस समय प्रधानमंत्री जनधन योजना लॉन्च की गई थी, उस समय आशंका जताई गई थी कि पैसे का ज्यादा मात्रा में सर्कुलेशन होने से मुद्रास्फीति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में खुदरा मुद्रास्फीति के डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि जिन राज्यों में ग्रामीण इलाकों में 50 प्रतिशत से ज्यादा जनधन खाते हैं, उन राज्यों में मुद्रास्फीति पर सकारात्मक असर पड़ा है।
कुल मिलाकर 30 करोड़ जनधन खातों में से काफी खाते नोटबंदी के फैसले के बाद खोले गए हैं। देश भर के सिर्फ 10 राज्यों में कुल खातों की 75 प्रतिशत (करीब 23 करोड़ खाते) संख्या है। इनमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 4.7 करोड़ खाते हैं। इसके बाद बिहार और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है।
एसबीआई की स्टडी में ग्रामीण और शहरी कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर जनधन खाते खुलने के प्रभाव को राज्य वार बताया गया है। यह रिसर्च का हिस्सा है, जिसे इस साल के आखिर तक जारी किया जाना है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह विश्लेषण इस बात की पुष्टि करता है कि अर्थव्यवस्था की औपचारिकता के अतिरिक्त, वित्तीय समावेशन में ठोस फायदे हैं, जिन्हें मुद्रास्फीति के आंकड़ों से समझा जा सकता है।’
ग्रामीण लोगों को बचत के लिए प्रेरित करने के अलावा, जनधन खातों ने उन्हें कई बुरी आदतों से भी दूर रखा है। एसबीआई की ग्रुप चीफ इकॉनमिक अडवाजर सौम्या कांति घोष ने यह रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जिन इलाकों में जनधन खाते बड़ी संख्या में खोले गए हैं, उनमें शराब और तंबाकू जैसी चीजों की बिक्री में कमी आई है। इसमें कहा गया है, ‘इसे लोगों को पैसा खर्च करने के व्यवहार में बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है। लोग नोटबंदी के बाद बचत की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों में लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी खर्च बढ़ाया है।