शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी ने रखी बुलेट ट्रेन की नींव

अहमदाबाद/नई दिल्ली। शिंजो आबे और पीएम मोदी ने बुलेट ट्रेन की नींव रखी, इसकी लागत 10,8000 करोड़ रुपये का अनुमान है, जिसमें 88 हजार करोड़ का कर्ज जापान देगा। इस कर्ज का ब्याज 0.1 फीसदी होगा, जिसे 50 साल में चुकाना होगा। इससे पहले दोनों ने बुलेट ट्रेन के रूट का मॉडल देखा। इसके बाद शिंजो आबे गांधीनगर में दांडी कुटीर जाएंगे। दोपहर में डेलिगेशन लेवल की बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच जापान से US-2 amphibious aircraft खरीदने और सैन्य हथियारों को साझेतौर पर बनाने को लेकर बात होगी। शिंजो आबे आज रात ही टोक्यो रवाना हो जाएंगे। माना जा रहा है कि परिवहन रक्षा समेत कई क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच 10 से ज़्यादा समझौते हो सकते हैं।
खास मेहमानों की भव्य मेज़बानी का मौका इससे पहले अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी दिया था। लेकिन जापानी पीएम के साथ ये गमर्जोशी कई सालों के रिश्तों की बानगी है जहां 2015 दिसंबर में पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आबे की अगवानी की थी। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत आए, वो सीधे अहमदाबाद पहुंचे जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन की कुछ खास बातें
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट भारत के विकास पर एक दूरगामी असर डालेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही भारतीय रेलवे विश्व स्तर पर इस तकनीक में एक अग्रणी के तौर पर आगे आएगी। 125 करोड़ आबादी वाले भारत देश में बुलेट ट्रेन एक ऐसा सपना है जो जल्द ही हकीकत में तब्दील हो जाएगा। केंद्र की मोदी सरकार ने यह तय किया है कि पूर्व निर्धारित 2023 की जगह बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 15 अगस्त 2022 तक पूरा कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारत और जापान दोनों ही मिलकर अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे।।
बुलेट ट्रेन को हकीकत में तब्दील करना इतना आसान काम नहीं है। वजह है इसमें होने वाला भारी भरकम खर्च और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी। अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के लिए लगभग कुल लागत 10,8000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों के चलते यह दोनों दिक्कतें खत्म हो गई हैं।
इसी के साथ इस कर्ज को भारत 50 साल में जापान को चुकाएगा। बुलेट ट्रेन के लिए दिए गए इस कार्य पर 0.1 फीसदी के ब्याज को जोड़ें तो अट्ठासी हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बदले भारत को जापान को 90500 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। यानी केवल 25 सौ करोड़ रुपये ज्यादा। इसके अलावा जापान से मिले इस कर्ज में एक सहूलियत यह भी है कि कर्ज की अदायगी में 15 साल का ग्रेस पीरियड है। इसका मतलब यह हुआ कि बुलेट ट्रेन के लिए मिले कर्ज की किस्त बुलेट ट्रेन शुरू होने के 15 साल बाद शुरू होगी।
अगर भारत 7 साल बाद बुलेट ट्रेन बनाने की शुरुआत करता तो 25 सौ करोड़ रुपये तो महंगाई की वजह से ही भर जाते। ऐसे में यह सौदा घाटे का सौदा तो बिल्कुल नहीं है। इतना ही नहीं जापान से कर्ज के साथी भारत को बुलेट ट्रेन की सबसे बेहतरीन और सुरक्षित तकनीक भी मिलेगी। मेक इन इंडिया के तहत बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के कलपुर्जे भारत में ही बनेंगे। इस वजह से देश में सहयोगी उद्योग बढ़ेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा। नई तकनीक आने से हमारे देश के इंजीनियरों को इसको समझने का मौका मिलेगा। इसके अलावा कर्ज और तकनीक के साथ जापान भारत को बुलेट ट्रेन के संचालन और रख-रखाव की ट्रेनिंग भी देगा यानी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जरिए देश में मेक इन इंडिया का भी विस्तार होगा। तो वहीं देश में लोगों को नए रोजगार भी मिलेंगे।
देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर का फासला तय करेगी। यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जाएगी। इस रूट पर 12 रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने जा रहा बुलेट ट्रेन रूट ज्यादातर जगहों पर एलिवेटेड होगा और इसका 7 किलोमीटर का हिस्सा मुंबई में समंदर के नीचे से होकर गुजरेगा।
भारत में चलने जा रही पहली बुलेट ट्रेन कैसी होगी और इसके स्टेशन कहां-कहां पर बनाए जाएंगे किस तरीके का रूट बनाया जाएगा और उसमें किस तरह के पिलर बनेंगे और क्या मटेरियल इस्तेमाल किया जाएगा इन सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी ने पूरी रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी 4 स्टेशनों पर रुकते हुए बुलेट ट्रेन से सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट में तय होगी। मुंबई और अहमदाबाद के बीच 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह स्टेशन बांद्रा, कुर्ला, कांप्लेक्स थाने, विरार बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भड़ौच, वडोदरा, आनंद अहमदाबाद और साबरमती होगा। इन स्टेशनों में मुंबई में बनने वाला रेलवे स्टेशन अंडरग्राउंड होगा और बाकी सभी स्टेशन एलिवेटेड होंगे।
7 किलोमीटर का रूट समंदर से गुजरेगा : बुलेट ट्रेन का रूट डबल लाइन का बनाया जाएगा। 508 किलोमीटर की लंबाई वाला रूट महाराष्ट्र गुजरात और दादरा नगर हवेली से होकर गुजरेगा। महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन रूट का 156 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में 351 किलोमीटर का हिस्सा और केंद्र शासित प्रदेश दादर नगर हवेली से 2 किलोमीटर का हिस्सा गुजरेगा। बुलेट ट्रेन रूट पर कई सुरंगे होंगी और इनमें से सबसे लंबी सुरंग 21 किलोमीटर की होगी। इसके अलावा हम आपको बता दें कि अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन रूट का 7 किलोमीटर का हिस्सा थाने क्रिक में समंदर के नीचे से होकर गुजरेगा। जापान के मुताबिक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को अधिकतम 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। लेकिन अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलाई जाएगी।