राहुल गांधी के बकर्ले यूनिवसिर्टी में दिए भाषण पर स्मृति ईरानी ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बकर्ले यूनिवसिर्टी में दिए भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसना राहुल गांधी की पुरानी आदत है। यह उनकी नाकाम रणनीति है। वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी राजनीतिक पीड़ा व्यक्त कर रहे थे। वह भूल गए कि 2014 में वोटर ने वोट के माध्यम से नरेंद्र मोदी में अपना विश्वास व्यक्त किया। राहुल द्वारा 2012 में कांग्रेस के अहंकार की बात कहना बहुत बड़ा कन्फेशन है। यह कांग्रेस के लिए चिंतन का विषय है। इसके जरिए वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी सवाल उठा रहे हैं।
आज अगर राहुल गांधी की सही सफलता और विफलता का मापदंड देखना चाहते हैं तो अमेठी जाकर देखना चाहिए। वह भारत को कैसे सुनहरा भविष्य दे सकता हूं पर चर्चा कर रहे थे तो वह अगर अमेठी के विकास पर चर्चा करते तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाता।
राहुल गांधी ने विदेश में कहा कि हिन्दुस्तान तो ऐसा ही है जहां परिवारवाद से सब कुछ चलता है तो शायद वह भूल गए कि हिन्दुस्तान में कई ऐसे नागरिक हैं जो कई क्षेत्रों में योगदान देते हैं लेकिन उनकी कोई राजनीतिक विरासत नहीं है। पीएम मोदी भी गरीब परिवार से आते हैं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दलित परिवार से आते हैं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी किसान परिवार से आते हैं और संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचे। इन तीन सर्वोच्च पदों पर इन व्यक्तियों का होना बताता है कि लोकतंत्र में परिवारवाद नहीं बल्कि मैरिट की जगह होती है। एक नाकाम वंशवादी राहुल गांधी आज सवाल उठा रहे हैं। राहुल ने वंशवाद को सही बताया। जीएसटी पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर स्मृति ने यह भी कहा कि राहुल गांधी सक्षम होते तो कांग्रेस में ही जीएसटी पास हो जाता।
गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बकर्ले यूनिवसिर्टी में मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि आज नफरत और हिंसा की राजनीति हो रही है। हिंसा का मतलब मुझसे बेहतर कौन जान सकता है। हिंसा में मैंने अपने पिता और दादी को खोया है। नोटबंदी को लेकर भी राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद को अंधेरे में रखकर नोटबंदी लाई गई। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। राहुल ने साथ ही यह भी कहा कि वह पीएम पद का उम्मीदवार बनने को तैयार हैं। अगर पार्टी कहेगी तो जिम्मेदारी लूंगा। राहुल ने वंशवाद पर कहा था कि हमारा देश परिवारवाद से ही चलता है। उन्होंने कहा, परिवारवाद पर हमारी पार्टी पर निशाना न साधें, हमारा देश इसी तरह काम करता है। अखिलेश यादव, एमके स्टालिन, अभिषेक बच्चन कई तरह के उदाहरण हैं। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2012 में कांग्रेस पार्टी के अंदर अहंकार भर गया था और पार्टी ने जनता से संवाद कम कर दिया, जिसके चलते लोगों से दूरी बन गई।