गोरखपुर में बच्चों के मौत का मामला : उन वादों का क्या जो आए दिन होते रहते हैं कि अब नहीं होगी इस बीमारी से बच्चों की मौत

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में आॅक्सीजन सप्लाई रुकने से पिछले 48 घंटों के दौरान 36 मासूमों की मौत हो गई है. विपक्षी पार्टियां योगी सरकार पर तीखे प्रहार कर रही हैं। उप्र की सरकार रक्षात्मक मुद्रा में है। रक्षात्मक होने के कारण ये भी है कि दिमागी बुखार इस इलाके में नई समस्या नहीं है और वतर्मान सीएम योगी इस इलाके के करीब 19 सालों से सांसद भी हैंै। दरअसल गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में इंसेफलाइटिस यानी दिमागी बुखार का खौफ इतना ज्यादा है कि उसे मौत का दूसरा नाम कहा जाता है। खासतौर से बीते कई सालों से बच्चे लगातार इसका शिकार हो रहे हैं।
उन वादों का क्या जो आए दिन होते रहते हैं कि अब नहीं होगी इस बीमारी से बच्चों की मौत : करीब दो साल पहले जब प्रधानमंत्री मोदी गोरखपुर में एम्स का उद्घाटन करने गए थे तब उन्होंने ऐलान किया था कि अब इस बीमारी से वह एक भी बच्चे को मरने नहीं देंगे। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बहुमत से बनी सरकार और गोरखपुर के ही सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उम्मीद जगी थी अब पूर्वांचल के बच्चे इस जानलेवा बीमारी के डर के बिना सो सकेंगे। लेकिन पिछले तीन दिनों में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुए मौत के तांडव ने ऐसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं जिनकी जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरवाजे तक जाती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 48 घंटों के दौरान 36 मासूम मौत के मुंह में समा चुके हैं और इसकी वजह सिर्फ इंसेफलाइटिस ही नहीं बल्कि यूपी सरकार की लापरवाही है। अस्पताल में आॅक्सीजन की सप्लाई ठप होने की वजह से हुई इन मौतों की खबर बाहर आने के बाद अब प्रशासन लीपापोती में लगा है लेकिन कुछ ऐसे तथ्य है झुठलाना प्रशासन के लिए मुमकिन नहीं है। गोरखपुर के इस अस्पताल में आॅक्सीजन की किल्लत अचानक ही पैदा नहीं हुई थी। आॅक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने बाकायदा प्रशासन को इस बात की जानकारी दी थी कि वह सप्लाई बंद देगी। बताया जा रहा है कि इस कंपनी का करीब 60 लाख रुपए अस्पताल पर बकाया था। पुष्पा सेल्स ने बाकायदा चिट्ठी लिखकर इस बात की चेतावनी भी दी थी वह अस्पताल को लिक्विड आॅक्सीजन की सप्लाई रोक देगी। लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। स्थानीय अखबारों में यह खबर भी छपी। कंपनी ने आखिरकार आॅक्सीजन की सप्लाई रोक दी नतीजतन ,मौत गोरखपुर में कई बच्चों की जिंदगी लील गई।
बच्चों की मौत की खबर आने के बाद बड़ी बेशर्मी के साथ इस हादसे को आॅक्सीजन सप्लाई के मामले से अलग करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन सवाल अब भी बरकरार है और यह सवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संजीदगी पर खड़ा हुआ है।

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