‘बाहुबली 2’ वर्किंग डे होने के बावजूद तमाम सिनेमाघरों में पहला शो ही था हाउसफुल

दो साल के इंतजार के बाद खुलासा हो ही गया कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा। वैसे इस सवाल को जानने का इंतजार दशर्कों ने दो साल तक किया। इस बात को जानने की सभी को इतनी बेताबी थी कि वर्किंग डे होने के बावजूद तमाम सिनेमाघरों में पहले शो ही हाउसफुल थे।
हिंदी भाषी दशर्कों में ऐसा क्रेज आमतौर पर खान तिकड़ी का ही दिखता है। हॉल में पैर रखते ही दशर्कों का उत्साह देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें नॉर्थ बेल्ट में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाला कोई स्टार नहीं है। जिस प्रभास को लोग दो साल पहले तक पहचानते भी नहीं थे, उसके लिए वे लाइन लगाकर टिकट ले रहे थे और सीटियां-तालियां बजा रहे थे। फिल्म के पहले सीन में जब मां की पूजा पूरा कराने के लिए बाहुबली प्रभास की एंट्री हुई तो दशर्कों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। साउथ के स्टार को ऐसा रिस्पॉन्स मिला तो लगा कि अब प्रभास को बॉलीवुड की फिल्में साइन कर ही लेनी चाहिए।
जहां तक फिल्म की बात है तो एंट्री ही नहीं, शुरुआत में कटप्पा के साथ बाहुबली की कॉमेडी पर भी दशर्कों ने खूब तालियां बजाईं। मामा-भांजे इसी रूप में देवसेना यानी अनुष्का शेट्टी से मिले थे। इसी बीच तकनीकी सूझबूझ के साथ जो सीन पिरोये गए है, बाहुबली के फैन्स ने उनको भी खूब सराहा। फिल्म में अगर हंसाने वाले सीन हैं तो बाहुबली के दूसरे हिस्से ने रुलाया भी। दम साधे दशर्कों की आंखें कई बार नम हुईं। मां शिवगामी का बेटे बाहु को महल से निकालना और कटप्पा का भारी दिल से प्यारे भांजे की पीठ में तलवार घोंपना, जैसे दृश्यों पर कई हाथ आंखें पोंछ रहे थे।
फिल्मों में कई सीन ऐसे भी हैं जो दशर्कों को हैरान कर देते हैं। और ऐसा बांधते हैं कि पलक झपकाते हुए भी लगता है कि कुछ छूट जाएगा। क्लाइमेक्स ऐसा जानदार है कि हॉलीवुड फिल्मों के छक्के छुड़ा दिए हैं। बाहुबली ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो बॉलीवुड की फिल्मों को सतही कहकर बस विदेशी फिल्मों का गुणगान करते हैं। फिल्म से एक खास कनेक्शन तब भी महसूस होता है जब इसके पोस्टर्स को आप स्क्रीन पर लाइव होते देखते हैं। बाहुबली का हाथी की सूंड पर चढ़ना, देवसेना का राजसी रूप, बाहु और देवसेना का एक साथ तीरकमान चलाना… जैसे सीन पर्दे पर एक अलग ही कनेक्शन सेट करते हैं।