आयकर विभाग का स्वच्छ धन अभियान का दूसरा चरण शुरू, 60 हजार लोगों की होगी जांच

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद कालेधन का पता लगाने के लिए आज ‘स्वच्छ धन अभियान’ का दूसरा चरण शुरू किया जिसके तहत 60 हजार लोगों की जांच की जाएगी।
आयकर विभाग की नीति निर्माता इकाई केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा है कि उसने नौ नवंबर 2016 से इस वर्ष 28 फरवरी के बीच करीब 9,334 करोड़ की अघोषित आय का पता लगाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। सीबीडीटी ने कहा, ‘1,300 उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों सहित 60 हजार से अधिक लोगों को नोटबंदी की अवधि के दौरान अत्याधिक नकद बिक्री के बाद जांच के लिए चुना गया है। उंचे मूल्य की संपत्ति की खरीद के 6,000 से अधिक सौदों तथा दूसरे देश भेजे गए धन के 6,600 मामले व्यापक जांच के दायरे में हैं।
सीबीडीटी ने कहा, ‘ऐसे मामले जिनमें जवाब नहीं मिला है, की भी विस्तृत जांच की जाएगी।’ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभियान का यह चरण शुरू करने से पूर्व संदिग्ध नकद जमा की पहचान के लिए आधुनिक डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल किया गया है। इस वर्ष 31 जनवरी को शुरू हुए स्वच्छ धन अभियान के पहले चरण के तहत विभाग ने आॅनलाइन प्रश्न पूछे थे और 17.92 लाख लोगों की जांच की थी जिसका 9।46 लाख लोगों ने ही जवाब दिया था।
राजस्व विभाग पिछले तीन वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष कर दोनों में 1.37 लाख करोड़ रपये से अधिक कर चोरी तथा 1,000 से अधिक मुखौटा कंपनियों की पहचान की है जो 13,300 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन में शामिल थी। कर चोरी करने वालों को चेतावनी देते हुए विभाग ने कहा कि वह कालेधन के खिलाफ कारर्वाई करती रही है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी लायी जाएगी।।
विभाग ने कहा कि संशोधित बेनामी सौदा निषेध कानून के तहत 245 बेनामी लेन-देन की पहचान की गयी है और 124 मामलों में 55 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की है। यह कानून नवंबर 2016 में प्रभाव में आया। राजस्व विभाग ने कुल 23,064 तलाशी लिये गये। इसमें से 17,525 मामलों में आयकर विभाग तथा शेष सीमा शुल्क, उत्पाद एवं सेवा कर इकाई ने तलाशी अभियान चलाये। कुल मिलाकर पिछले तीन वित्त वर्ष (2013-15 से 2015-16) के दौरान 1।37 लाख करोड़ रुपये कर चोरी का पता लगाया गया।
इसमें 69,434 करोड़ रुपये आयकर विभाग, 11,405 करोड़ रुपये सीमा शुल्क, 13,952 करोड़ रुपये केंद्रीय उत्पाद तथा 42,727 करोड़ रुपये मूल्य के सेवा कर चोरी शामिल हैं। साथ ही 2,814 मामलों में आपराधिक अभियोजन शुरू किया गया। इसमें 1,066 आयकर से जुड़े मामले हैं। कुल 3,893 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा गलत गतिविधियों में शामिल 1,155 मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कारर्वाई की गयी। ये कंपनियां 13,300 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन में शामिल थी।

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