देश में हर मिनट दो की मौत कैंसर के कारण हो रही है

पटना। देश में कैंसर से हर मिनट दो की मौत, बिहार में सालाना मिलते 1.25 लाख मरीजदेश में कैंसर से हर मिनट दो की मौत, बिहार में सालाना मिलते 1.25 लाख मरीज बिहार सहित देश में कैंसर से मौत के आंकड़े लगातर बढ़ रहे हैं। देश में हर मिनट दो की मौत कैंसर के कारण ही हो रही है।
बिहार सहित पूरे देश के लिए कैंसर एक बड़ी चुनौती है। तंबाकू चबाकर या फिर बीड़ी के दो कश मारकर थकान मिटाने की लत खासकर मेहनतकश लोगों को महंगी पड़ रही है। और भी कई कारण हैें, जिनसे कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बिहार में हर वर्ष 1.25 लाख नए कैंसर मरीज डिटेक्ट होते हैं।
पटना के प्रमुख अस्पतालों आइजीआइएमएस, पीएमसीएच, महावीर कैंसर संस्थान से मिले आकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में 14 मिलियन नए कैंसर के रोगियों का पता चलता है। इनमें 8.2 मिलियन कैंसर मरीजों की मौत हो जाती है। भारत में हर साल करीब 10 लाख नए कैंसर रोगियों का पता चल रहा है, जिनमें प्रत्येक साल करीब सात लाख की मौत हो जाती है। यानी हर मिनट में दो कैंसर के मरीजों की मौत।
महावीर कैंसर संस्थान की सजर्री विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति जैन बताती है कि अकेले बिहार में हर साल कैंसर के 1.25 लाख नए मरीज मिल रहे हैं। इनमें भी 60-65 फीसदी कैंसर मरीजों की प्रतिवर्ष मौत हो जाती है। यदि यह सिलसिला यहीं नहीं थमा तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। बिहार में कैंसर मरीजों की संख्या में वृद्धि जागरूकता के अभाव में हो रही है। पुरुषों में 40 फीसद कैंसर मुंह एवं गले का होता है, जबकि महिलाओं में यह स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर के केस अधिक आते हैं। इसके अलावा गॉल ब्लाडर, फेफड़ा, पेट, आंत, ब्लड सहित अन्य प्रकार के कैंसर मरीज भी हैं।
महावीर कैंसर संस्थान की डॉ. प्रीति जैन बताती हैं कि शोध के अनुसार गंगा किनारे वाले जिलों में गॉल ब्लाडर के कैंसर मरीज सर्वाधिक हैं। इसके कारणों का पता किया जा रहा है। अभी तक की जांच से पता चला है कि पानी में आॅर्सेनिक की मात्रा अधिक होना गॉल ब्लाडर कैंसर का कारण बन रहा है।
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल : पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में कैंसर के इलाज की व्यवस्था है। यहां ओपीडी व इनडोर में भी कैंसर मरीजों का इलाज हो रहा है। संस्थान में कीमोथरेपी की सुविधा है। फिलहाल कोबाल्ट मशीन के सोर्स की अवधि (रेडिएशन की अवधि) खत्म हो जाने के कारण मरीजों की थरेपी बंद है। पीएमसीएच के रेडियोथरेपी के विभागाध्यक्ष डॉ. पीएन पंडित ने बताया कि जल्द ही कोबाल्ट मशीन का सोर्स व अन्य अत्याधुनिक मशीन लगने की उम्मीद है।
इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस (आइजीआइएमएस) : आइजीआइएमएस के कैंसर विभाग में कीमोथरेपी व कोबाल्ट मशीन से सेंकाई की सुविधा उपलब्ध है। यहां लगे ब्रैकीथरेपी का सोर्स अवधि खत्म हो जाने के कारण पिछले एक वर्ष से लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) : एम्स, पटना में कैंसर मरीजों के लिए सजर्री व कीमोथरेपी की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि संस्थान में अभी कई आवश्यक उपकरण नहीं लग पाए हैं। संस्थान में रेडिएशन यूनिट की स्थापना को लेकर कारर्वाई चल रही है। एम्स की रेडियोथरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीतांजलि सिंह ने बताया कि संस्थान में अभी सजर्री व कीमोथरेपी की सुविधा लोगों को दी जा रही है। जल्द ही लिनियर एक्सीलेटर, ब्रैकी थिरेपी सहित कई उपकरण लग जाएंगे। इससे सूबे के लोगों को कम खर्च में कैंसर का इलाज संभव हो सकेगा।
महावीर कैंसर संस्थान : महावीर मंदिर न्यास समिति के अंतर्गत चल रहे महावीर कैंसर संस्थान में मरीजों को इलाज व आॅपरेशन की सुविधा दी जा रही है। संस्थान में कोबाल्ट मशीन, लिनियर एक्सीलेटर, कीमोथैरेपी, ब्रैकीथैरेपी, लेजर थैरेपी आदि मशीनों से मरीजों की जांच की जाती है। माइक्रो वॉसक्यूलर सजर्री मुंह एवं गले के कैंसर मरीजों के लिए है। अन्य सभी प्रकार के कैंसर रोगियों का आॅपरेशन व इलाज हो रहा है।

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