प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी योजना की जानकारी बस इनको ही थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का फैसला आठ नवंबर को लिया था। इसकी जानकारी को काफी गोपनीय रखा गया था क्योंकि अगर ये जानकारी लीक हो जाती तो लोग अपने अवैध या कालेधन को सोना या जमीन खरीदकर खपा सकते थे। इस फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भरोसेमंद अधिकारी समेत छह लोगों की एक टीम को थी।
नोटबंदी के फैसले की घोषणा से पहले ये छह सदस्य टीम पीएम आवास पर दो कमरों में दिन रात काम कर रही थी। पीएम मोदी के इस फैसले के बारे में जिस अधिकारी को जानकारी थी वह हंसमुख अधिया है। अधिया के अलावा उनके पांच साथियों को इस फैसले के बारे में जानकारी थी। इस टीम से वादा लिया गया था कि वह इस फैसले को गोपनीय रखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा कर अपनी साख को दांव पर लगा दिया और कई खतरे भी मोल लिए। उन्हें पता था कि उनका नाम और लोकप्रियता दांव पर लगी है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यह फैसला लिया। आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा से पहले पीएम मोदी ने जो कैबिनेट बैठक बुलाई थी उसमें उन्होंने कहा था कि मैं हर तरह से अध्ययन कर लिया है और अगर कुछ गलत होता है तो इसकी जिम्मेदार मेरी होगी। पीएम मोदी खुद निजी तौर पर नोटबंदी को लागू करने की निगरानी कर रहे थे। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी हंसमुख अधिया के नेतृत्व में एक टीम पूरे मामले में नजर बनाए हुए थी। 58 वर्षीय अधिया 2003-06 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्याकाल के दौरान प्रधान सचिव थे। अधिया को 2015 में राजस्व सचिव बनाया गया था। वैसे उनकी रिपोर्टिंग वित्तमंत्री अरुण जेटली को थी लेकिन वह सीधा पीएम मोदी से संपर्क में रहते थे। इतना ही नहीं जब दोनों मिलते थे तो गुजराती में ही बात करते थे। केन्द्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। आरबीआई के पूर्व मुख्य अथर्शास्त्री नरेंद्र जाधव ने बताया कि इस तरह के हंगामे के लिए कभी कोई तैयार नहीं रहता लेकिन यह रचनात्मक हंगामा है। जाधव फिलहाल राज्यसभा में भाजपा के सांसद हैं।

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