साफ-सुथरी छवि है मनोज सिन्हा की, इसीलिए यूपी के सीएम पद के अहम दावेदार हैं

नई दिल्ली। पूर्वांचल के एक गांव से निकलकर आईआईटी बीएचयू में पढ़ाई, छात्र राजनीति में सक्रियता, तीन बार लोकसभा के सांसद, रेल राज्यमंत्री और अब यूपी के सीएम पद की रेस में सबसे आगे दिख रहे मनोज सिन्हा की पहचान एक साइलेंट परफॉर्मर की रही है। लो-प्रोफाइल रहकर काम करने वाले मनोज सिन्हा की इन्हीं खासियतों ने उन्हें यूपी सीएम पद की रेस में सबसे आगे रखा है।
यूपी के गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिन्हा 1999 में 13वीं लोकसभा के दौरान सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सांसदों की सूची में शामिल थे। हाल ही में एक मैगजीन ने अपने सर्वे में मनोज सिन्हा को सात सबसे ईमानदार सांसदों में जगह दी थी। तीसरी बार पूर्वी यूपी के गाजीपुर से सांसद चुने गए मनोज सिन्हा काम के मामले में भी अलग दिखते हैं। सांसद निधि के लिए मिले पैसे का अधिकांश हिस्सा बहुत सारे सांसद खर्च नहीं कर पाते। लेकिन मनोज सिन्हा उन चुनिंदा सांसदों में से हैं जिन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र की जनता के विकास के लिए अपना पूरा फंड खर्च किया।
तीन बार सांसद होने के अलावा मनोज सिन्हा स्कूल आॅफ प्लानिंग की जनरल काउंसिल और ऊर्जा पर संसदीय कमेटी के भी वे सदस्य रह चुके हैं। केंद्र में संचार मंत्री के तौर पर बिहार-यूपी के कई हिस्सों में कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण पर मनोज सिन्हा ने खास फोकस के साथ काम किया।
1 जुलाई 1959 को गाजीपुर के मोहनपुरा गांव में जन्मे मनोज सिन्हा भूमिहार जाति से आते हैं जो पहले जमींदार होते थे। मनोज सिन्हा की छवि पढ़े लिखे और सौम्य व्यवहार वाले नेता की है। खेती-किसानी के बैकग्राउंड से आने वाले मनोज सिन्हा विकास के लिए पिछड़े गांवों पर खास फोकस रखते हैं।

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