विवेक मर्डर केस: चार दिन बीत गए हैं लेकिन उस अंधेरी रात को यादकर सना आज भी सिहर उठती हैं

लखनऊ।  विवेक तिवारी के शरीर में गोली लगी हुई थी.. लेकिन तब भी वह अपनी कलीग और उस रात के हादसे की एकमात्र चश्मदीद गवाह सना खान को बचाने की कोशिश करते रहे। सना कहती हैं, ‘जितनी जान बची थी उनमें, उतने में वह आगे गाड़ी बढ़ाते रहे… वह गाड़ी बढ़ाते रहे और कुछ दूरी पर स्थित एक खंभे से कार टकरा गई और वह अपनी सीट पर पीछे की ओर गिर गए और उनका सिर एक ओर झुक गया। वह तब भी सांस ले रहे थे।’
शुक्रवार देर रात लखनऊ के गोमती नगर इलाके में ऐपल एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में चश्मदीद गवाह सना ने पुलिस की उस थिअरी का भंडाफोड़ कर दिया जिसमें बताया जा रहा था कि कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने डिवाइडर पर खड़े होकर गोली चलाई थी और उस वक्त कार खड़ी हुई थी। सना बताती हैं, ‘कार उस समय नॉर्मल स्पीड में थी और सड़क के बाईं ओर ही चल रही थी और ऐसा कुछ भी नहीं था जो पुलिस को फायरिंग करने पर मजबूर करे।’ इस हादसे को चार दिन बीत गए हैं लेकिन उस अंधेरी रात को यादकर सना आज भी सिहर उठती हैं। न ठीक से सो पाती हैं और न ही कुछ खाती हैं। वह बताती हैं, ‘हम फोन लॉन्च के कार्यक्रम से लौट रहे थे जब दो वर्दीधारी कॉन्स्टेबल एक मोटरबाइक से कार की तरफ आए। कार नॉर्मल स्पीड से चल रही थी और सामने मोटरबाइक आकर खड़ी हो गई। पिछली सीट पर बैठा एक कॉन्स्टेबल बाइक से उतरा।

उन्होंने आगे बताया, ‘कॉन्स्टेबल के हाथ में लाठी थी। वह हमें रोकना चाहते थे और कार से बाहर आने के लिए बोल रहे थे लेकिन काफी रात हो चुकी थी और हमें पता नहीं था कि क्यों रोका जा रहा है। सर ने एक जिम्मेदार शख्स की तरह कार धीरे-धीरे बढ़ाई क्योंकि बगल में महिला बैठी थी। वह (कॉन्स्टेबल) हमपर चिल्ला रहे थे और किसी पहचान के लिए नहीं पूछा था। हमने उनसे कुछ बोला भी नहीं और न ही कोई कहासुनी हुई। कुछ देर बाद कॉन्स्टेबल मेरी तरफ वाली खिड़की पर आया और अपनी लाठी से मुझे कोंचने लगा। सर ने उसे हटाने की कोशिश की।’

सना ने बताया, ‘अगले ही पल दूसरा कॉन्स्टेबल जो कार के सामने खड़ा था उसने अपनी पिस्तौल निकाली और सर पर फायर कर दिया। सर के खून निकलने लगा। मैं डर गई थी और चिल्ला रही थी। मुझे नहीं पता था कि क्या करना है। मैं खून रोकने के लिए चोट की तरफ देखने का प्रयास कर रही थी लेकिन सर ने कार चलानी जारी रखी। कॉन्स्टेबल का मोटरबाइक से उतरना और गोली चलाना अचानक सब एक मिनट में हो गया।’ सना ने आगे बताया, ‘जब सर कार आगे की ओर कार बढ़ाने लगे थे तो उनकी कार का आगे का पहिया मोटरबाइक के आगे के पहिए से टकरा गया था जिससे वह सड़क पर गिर गई थी। लेकिन कोई भी सिपाही इस वजह से घायल नहीं हुआ था।’ विवेक ने कार तकरीबन आधा किमी तक चलाई और कार सड़क किनारे लगे एक खंभे से टकरा गई। सना गाड़ी से बाहर आई और मदद के लिए चिल्लाने लगी।

वह कहती हैं, ‘मेरे पास मेरा फोन नहीं था इसलिए मैंने सड़क किनारे खड़े कुछ ट्रक ड्राइवरों से फोन के लिए कहा लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास नहीं है। मैं इधर-उधर मदद के लिए दौड़ती रही। लगभग 10-15 मिनट बाद एक पुलिस पट्रोल गाड़ी वहां आई। उन्होंने ऐंबुलेंस को कॉल करने की कोशिश की लेकिन काफी समय लग रहा था इसलिए तय किया गया कि सर को पुलिस की गाड़ी में ही ले जाया जाएगा।’

सना ने बताया सांसें तब तक चल रही थी और उन्हें आरएमएल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें देखकर पीजीआई रिफर करने के लिए कहा। सना के मुताबिक, ‘मैं पुलिस से कहती रही कि मुझे घर छोड़ दें ताकि मैं खुद के फोन से कलीग को कॉल करके मदद मांग सकूं। अस्पताल से मुझे कैसरबाग पुलिस थाने ले जाया गया जहां 5 मिनट के इंतजार के बाद एक लेडी कॉन्स्टेबल वहां आई और मुझे गोमती नगर थाने ले जाया गया।’

सना ने बताया, ‘वहां मेरी गवाही ले ली गई थी। मैंने पुलिस अधिकारियों को सब कुछ बताया दिया था और एक लेडी कॉन्स्टेबल इसे नोट कर रही थी। मैंने पेपर साइन कर दिए लेकिन मैंने उसे पढ़ा नहीं था और न ही पुलिस से इसे पढ़ने को कहा। मेरा पूरा ध्यान इस पर था कि सर को पीजीआई रिफर किया गया या नहीं। उन्होंने मुझे बताया भी नहीं कि सर की मौत हो चुकी थी। जब मैं घर पहुंची, अपना फोन लेकर वापस अस्पताल गई तब जाकर मुझे मालूम हुआ।’

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