मोदी सरकार एक साथ चुनाव कराने को लेकर गंभीर

मोदी सरकार एक साथ चुनाव कराने को लेकर गंभीर नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर आमसहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। यह बैठक विधि आयोग द्वारा इस मामले में कानूनी ढांचे की सिफारिश के बाद आयोजित की जा सकती है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर नेताओं के बीच चर्चा का दायर बढ़ाने के लिए आगामी दिनों में सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है। लेकिन बैठक बुलाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार विधि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जो दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा पेश करेगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सरकार के पास आने के बाद उस पर चर्चा के विस्तृत बिन्दु होंगे। चुनाव एक साथ कराने की व्यावहारिकता की जांच कर रहे आयोग ने इससे पहले अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों से नजरिया पूछा था। भाजपा ने विधि आयोग को लिख कर दिया है कि वह संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने की पक्षधर है। पार्टी का साफ कहना है कि देश हमेशा चुनावी मोड में नहीं रह सकता इससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि यदि सभी विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराने पर सहमति नहीं भी बनती है तो कम से कम 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जा सकते हैं। दरअसल इस वर्ष दिसंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। यदि इन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने पर सहमति बनती है तो कुछ समय के लिए इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा।

ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम में 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे इसलिए इन राज्यों के साथ कोई दिक्कत नहीं है। जिन राज्यों को छह महीने पहले चुनावों में जाना पड़ सकता है उनमें हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अक्तूबर-नवंबर 2019 में होने हैं। यदि मोदी सरकार इन राज्यों में जल्द चुनाव कराने का फैसला लेती है तो झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारें सहमत हो सकती हैं क्योंकि इन सभी राज्यों में भाजपा की ही सरकारें हैंं

इस बीच, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसे इस बात का कोई पता नहीं है कि 11 राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने हैं या सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने हैं। आयोग का कहना है कि वह किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहता है और चुनावी तैयारी नियमित रूप से चलती रहती है।

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