मैच को कैसे जीता भुवनेश्वर ने, बताए कुछ खास

पल्लेकल। टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मैच पल्लेकेले के मैदान पर कल यानि बृहस्पतिवार को खेला गया था। जिसमें भारत को 3 विकेट से जीत हासिल हुई थी। श्रीलंका के खिलाफ आठवें विकेट के लिए महेंद्र सिंह धोनी के साथ 100 रनों की साझेदारी करने वाले गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने अपने बल्ले का लोहा मनवाया। एमएस धोनी और भुवनेश्वर की जोड़ी ने ऐसे समय में भारतीय टीम को जीत दिलाई, जब क्रिकेट देख रहे दर्शक भारत की जीत की उम्मीद छोड़ चुके थे। मैच खत्म होने के बाद भुवनेश्वर ने अपनी इस बल्लेबाजी का श्रेय महेंद्र सिंह धोनी को दिया। वनडे क्रिकेट में अपना पहला अर्धशतक जमाने वाले भुवी ने कहा कि उन्हें पूर्व कप्तान धोनी ने टेस्ट क्रिकेट की तरह पारी खेलने को कहा था।
इसके बाद भुवनेश्वर ने नाबाद 53 रन बनाए और भारत ने यह मैच 3 विकेट से जीता। भुवनेश्वर ने मैच के बाद कहा, ‘जब मैं बल्लेबाजी के लिए उतरा तो धोनी ने मुझे टेस्ट क्रिकेट की तरह अपना स्वाभाविक खेल दिखाने को कहा। उन्होंने कहा कि दबाव नहीं लूं क्योंकि काफी ओवर बाकी हैं। हमें पता था कि आराम से खेलने पर लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होगा।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे पता था कि उन हालात में खोने के लिए कुछ नहीं था क्योंकि हमारे 7 विकेट पहले ही गिर चुके थे। मैं सोच रहा था कि जितना हो सकेगा, मैं धोनी की मदद करूंगा। मैने वही कोशिश भी की।’
भुवनेश्वर ने कहा, ‘धनंजय का एकसाथ छह विकेट लेना हैरानी की बात थी क्योंकि शुरुआती साझेदारी बहुत अच्छी हुई थी। इसके बाद 3-4 विकेट गिर गए तो हम दबाव में आ गए। ड्रेसिंग रूम या एमएस धौनी की ओर से कोई संदेश नहीं था।’ भुवी ने बताया, ‘धौनी ने सिर्फ यही कहा कि जितनी देर हो सके, क्रीज पर डटा रहूं। मैं भी यही चाहता था क्योंकि पूरे ओवर टिके रहने पर ही हम जीत सकते थे।’
मैन आॅफ द मैच रहे धनंजय का सामना करने के सवाल पर भुवनेश्वर ने कहा , ‘मैंने उसके खिलाफ रणनीति बनाई थी। वह आॅफ स्पिनर है, लेकिन लेग स्पिन और गुगली डाल रहा था जो हैरानी की बात थी। मैं उसकी खराब गेंदों का इंतजार कर रहा था। बाहर जाती गेंदों से मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। उसने सारे विकेट गुगली पर लिए लिहाजा मेरी रणनीति उसकी इनकमिंग गेंदों को बखूबी खेलने की थी। शुरुआत में मुझे परेशानी हुई, लेकिन बाद में ठीक हो गया।’ उन्होंने कहा, ‘यह बिल्कुल टेस्ट मैच जैसी स्थिति थी। मैं संजय बांगड़ को धन्यवाद दूंगा, जिन्होंने टेस्ट सीरीज में मुझ पर काफी मेहनत की। मैं इस तरह के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार था।’

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