पाक में ठिकाना बना रहा है चीन

बीजिंग। अमेरिका द्वारा पाक के खिलाफ उठाए जा रहे शख्त कदमों का फायदा चीन उठाने की तैयारी कर रहा है। चीन ने पहले से ही जिबूती में अपना एक सैन्य अड्डा बना रखा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह बना रहा चीन वहां एक और सैन्य बेस हासिल करने के लिए इस्लामाबाद से समझौता सकता है।
एक सैन्य विशेषज्ञ झाउ चेनमिंग के हवाले से रिपोर्ट में यह दावा किया है, जिसमें यह भी कहा गया है कि चीन जहां नौसैन्य ठिकाने बनाने की फिराक में है, वह ग्वादर के समीप ही स्थित है। रिपोर्ट में चेनमिंग के हवाले से कहा गया है कि चीन को अपने युद्धपोतों के लिए ग्वादर में एक और नौसैन्य ठिकाना बनाने की जरूरत है, क्योंकि अब यह एक नागरिक बंदरगाह है। चेनमिंग ने युद्धपोतों और मालवाहक जहाजों के लिए अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर इसे सामान्य प्रक्रिया बताया।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि चीन की नजर जिबूती के बाद अब जिवानी द्वीप पर है। सामरिक नजरिए से बेहद अहम जिवानी द्वीप पाकिस्तान के ग्वादर में है। यह ईरान की सीमा से सटा हुआ है और सबसे अहम बात यह है कि यह भारत द्वारा विकसित चाबहार बंदरगाह से बेहद करीब है। ऐसे में चीन की इस चाल से भारत की भी चिंता बढ़ सकती है।
2018 के पहले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ट्विटर के जरिए पाकिस्तान पर किए गए हमले को लेकर एक प्रमुख चीनी अखबार ने दावा किया है कि इस ट्वीट के कारण पाकिस्तान और चीन एक दूसरे के और ज्यादा करीब आए हैं। ग्लोबल टाइम्स विशेषज्ञों ने दावा किया है कि कि चीन को इस्लामाबाद के और करीब इसलिए जा रहा है क्योंकि अमेरिका और भारत के संबंधों में तेजी से मजबूती आई है।
मौजूदा समय में पाकिस्तान अमेरिका के निशाने पर है। पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है। इस साल की शुरुआत के पहले दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को जो धमकी दी थी, उस पर अमल करने का सिलसिला जारी है। अब उसने पाकिस्तान को दी जाने वाली हर तरह की सैन्य मदद रोकने का एलान किया है। इसके तहत दो अरब डॉलर (लगभग 13 हजार करोड़ रुपये) की सहायता रोकी जा रही है। यह राशि पिछले साल पाकिस्तान की तरफ से अमेरिकी सेना को अफगानिस्तान में की गई मदद के बदले दी जाने वाली थी।
वहीं पिछले मंगलवार को ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को विदेशी सैन्य सहयोग के नाम पर 25.5 करोड़ डॉलर की मदद रोकने का एलान किया था। अमेरिका का यह कदम न सिर्फ पाकिस्तान की माली हालात को और डांवाडोल करेगा, बल्कि सैन्य आधुनिकीकरण को भी बड़ा झटका देगा।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से इस घोषणा की अहमियत पाकिस्तान भी समझ रहा है। यही वजह है कि इस बार पाकिस्तान सरकार की तरफ से कोई तल्ख प्रतिक्रिया नहीं जताई गई है। इसके बदले उसने संयमित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि वह इस फैसले का अध्ययन कर रहा है। इस बारे में अमेरिकी प्रशासन के साथ भी बात की जा रही है। इसका क्या असर होगा उसके बारे में भी बाद में ही बताया जा सकेगा।
शुक्रवार देर शाम पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति में अमेरिका से यह भी कहा गया है कि वह अपनी तरफ से कोई समय सीमा तय न करे और न ही बार बार लक्ष्य बदले। इसका अमेरिका और पाकिस्तान के हितों पर उलटा असर भी हो सकता है। इस विज्ञप्ति में आतंकी गतिविधियों के लिए पूरी जिम्मेदारी अफगानिस्तान के आतंकी संगठनों और वहां की सरकार की निष्क्रियता पर डालने का प्रयास किया गया है, लेकिन अमेरिका में जिस तरह से पाकिस्तान विरोधी मूड अभी है, उससे इसका कुछ असर होगा, यह कहना मुश्किल है।

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