डोकलाम पर फिर मंडराता संकट का साया, दादागिरी दिखा रहा ड्रैगन

पेइचिंग। डोकलाम को लेकर चीन और भारत एक बार फिर भिड़ते नजर आ रहे हैं और दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के हैरानीजनक विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। एक तरफ चीन जहां अपनी सीनाजोरी कर रहा है वहीं भारत मामले को शांत करने में लगा हुआ है। डोकलाम में सड़क चौड़ी करने और सेना बढ़ाने पर चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि डोकलाम हमारा हिस्सा इसलिए सेना की मौजूदगी विवाद का मुद्दा नहीं होना चाहिए अपनी संप्रभुता की रक्षा करना हमारा अधिकार है। जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने डोकलाम में चीनी सेना की तैनाती और सड़क बनाने की खबरों को खारिज किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दिए एक बयान में कहा, ‘हमने डोकलाम पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं, 28 अगस्त के बाद से डोकलाम में विवादित भारत-चीन के बीच सैन्य गतिरोध की जगह और इसके आसपास के इलाकों में कोई नया घटनाक्रम नहीं हुआ है।’ मंत्रालय ने कहा, ‘इलाके में यथास्थिति बनी हुई है। इसके विपरीत कुछ भी कहना गलत है। ‘
सूत्रों के मुताबिक डोकलाम में चीन अपने सैनिकों की संख्या धीरे धीरे बढ़ा रहा है जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। हालांकि भारत की ओर से डोकलाम में किसी भी तरह की गतिविधि होने से इंकार किया गया है। गौरतलब है कि चीन ने डोकलाम में उस जगह के पास बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को तैनात कर रखा है जहां 73 दिन तक भारत और चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध रहा था। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर तनाव अभी तक कम नहीं हुआ है।
डोकलाम पठार में चुंबी घाटी में चीनी बलों की मौजूदगी की वजह से तनाव पसरे होने का संकेत वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने भी दिया है। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष सीधे तौर पर आमने-सामने नहीं हैं। हालांकि चुंबी घाटी में अब भी उनके जवान तैनात हैं और मैं आशा करता हूं कि वे वापस चले जाएंगे क्योंकि इलाके में उनका अभ्यास पूरा हो गया है।’

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