जजों के अप्वॉइंटमेंट का मामला : कॉलेजियम से भेजे गए 43 नाम लौटाने पर केन्द्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया नामंजूर

<p style=”text-align: justify;”>नई दिल्ली। जजों के अप्वॉइंटमेंट के लिए कॉलेजियम से भेजे गए 43 नाम लौटाने के केन्द्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार इन नामों पर 3 हफ्ते के अंदर दोबारा विचार करे। कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में जजों की भर्ती के लिए 77 नामों की लिस्ट केंद्र के पास भेजी थी। केन्द्र ने इनमें से 34 नाम मंजूर करके 43 नाम लौटा दिए थे। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल कबोतरा की पीआईएल पर सुनवाई कर रहा था।
इससे पहले इस मामले में 11 नवंबर को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस शिवाकीर्ति सिंह और जस्टिस एल. नागेश्वर राव की बेंच में सुनवाई हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पेश हुए थे।
रोहतगी ने कोर्ट से कहा था कि कॉलेजियम के भेजे हुए 77 में 34 नामों के अप्वाइंटमेंट पर सरकार ने मुहर लगा दी है। बाकी बचे 43 नामों पर दोबारा विचार के लिए कॉलेजियम के पास भेज दिया गया है। रोहतगी ने बताया, केंद्र ने मेमोरेंडम आॅफ प्रोसिजर का नया ड्राफ्ट दोबारा विचार के लिए 3 अगस्त को भेज दिया था, लेकिन इस पर जवाब नहीं मिला।
सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में देरी को लेकर पहले सरकार को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि कॉलेजियम की रिकमंडेशन के बावजूद अप्वाइंटमेंट में देरी क्यों हो रही है, पूरे संस्थान को ठप नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जजों की नियुक्ति में देरी के चलते कोर्ट रूम लॉक करने के हालात आ गए हैं। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या लोगों को न्याय देना बंद कर दिया जाए।
चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया ने कहा कि केंद्र इसे ईगो ना बनाए। ऐसी कंडीशन नहीं आनी चाहिए कि एक इंस्टीट्यूशन दूसरे के सामने खड़ा हो जाए। उन्होंने कहा, ज्यूडीशियरी को बचाना होगा। केंद्र जवाब दे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की लिस्ट का क्या हुआ। अगर कोई दिक्कत है तो लिस्ट हमें भेजे, हम फिर से विचार करेंगे। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि जो नाम भेजे गए थे, उनमें से कई नाम सही नहीं थे।

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