किसानों का कर्ज माफ नहीं, उद्योगपतियों का कर दिया : राहुल गांधी

भोपाल। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार ने किसानों का कर्ज माफी नहीं किया लेकिन उद्योगपतियों का माफ कर दिया। राहुल ने कहा, ‘मैं एक बार प्रधानमंत्री कार्यालय गया था, वह भी किसानों का कर्ज माफ करने की मांग को लेकर लेकिन उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने बाले मोदी ने किसानों का कर्ज माफ नही किया।’

बताते चलें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए देश के दो बड़े राजनीतिक दलों (कांग्रेस और बीजेपी) के मुखिया इन दिनों राज्य की खाक छान रहे हैं। एक अपना गढ़ बचाने की हर कोशिश कर रहा है तो दूसरा अपना खोया हुआ गढ़ पाने की! दोनों ही दर-दर घूम रहे हैं, मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। साथ ही एक दूसरे की जड़ें खोदने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

इसी क्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार सुबह दिल्ली से ग्वालियर पहुंचे। उन्होंने दतिया जाकर पीताम्बरा देवी के दर्शन किए, उसके बाद दतिया में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। दतिया के बाद वह डबरा गए। शाम को ग्वालियर में रोड शो किया। रात वह ग्वालियर में ही गुजारेंगे। मंगलवार को श्योपुर और मुरैना जिलों का दौरा करेंगे। राहुल ग्वालियर के एक गुरुद्वारे में मत्था टेकने भी जाएंगे।

उधर अमित शाह रविवार से ही मध्यप्रदेश में हैं। रविवार को उन्होंने होशंगाबाद जिले में बूथ लेबल कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। कार्यकर्ताओं के बीच शाह ने खुद को और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी का छोटा कार्यकर्ता बताते हुए कहा, ‘पार्टी हम जैसे छोटे कार्यकर्ताओं की मेहनत को समझती हैं। पार्टी एक नेता की नहीं, हर कार्यकर्ता उसका मालिक है।’

बता दें कि मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अमित शाह का यह तीसरा दौरा है। हर दौरे में वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर सीधे हमले करते आए हैं। इस बार भी उन्होंने राहुल पर ही निशाना रखा है। होशंगाबाद के बाद सतना, रीवा और जबलपुर की सभाओं में शाह राहुल गांधी को ही ‘धमकाते’ नजर आए। उधर राहुल ने भी दतिया में शाह पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा, ‘मेरा और मेरे परिवार का हिसाब मांगने की बजाय अमित शाह मध्यप्रदेश में 15 साल की बीजेपी सरकार का हिसाब बताएं। मैं एक बार प्रधानमंत्री कार्यालय गया था, वह भी किसानों का कर्ज माफ करने की मांग को लेकर लेकिन उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने बाले मोदी ने किसानों का कर्ज माफ नही किया।’

दरअसल, दोनों नेता मध्यप्रदेश को अपनी प्रयोगशाला मान कर चल रहे हैं। बीजेपी जहां किसी भी कीमत पर चौथी बार सत्ता में वापसी करना चाहती है तो कांग्रेस किसी भी कीमत पर 15 साल से खोई सत्ता को हासिल करना चाहती है। 11 दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम दोनों ही दलों के लिए मील का पत्थर सावित होने वाले हैं। अगर कांग्रेस हारी तो उसकी हालत उत्तरप्रदेश जैसी हो जाएगी। वहीं अगर बीजेपी हारी तो यह उसके पतन की शुरुआत भी हो सकती है। मध्यप्रदेश की हार का असर लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। ऐसे में यहां की हार मोदी का सपना तोड़ सकती है।

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