उन्नाव व कठुआ सामहिक दुष्कर्मः स्‍वाति मालीवाल का राजघाट पर अनशन

नई दिल्ली। उन्नाव और कठुआ सामूहिक दुष्कर्म मामलों लेकर दिल्‍ली महिला आयेाग (DCW) की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने राजघाट पर अनशन शुरू कर दिया है। डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष की मांग है कि दुष्कर्म के आरोपियों को छह महीने में फांसी की सजा हो। इस संबंध में स्वाति मालीवाल ने बृहस्पतिवार को ही प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर इस मामले में हस्‍तक्षेप करने की मांग की थी।

अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी स्वाति मालीवाल ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री छोटे बच्चों के दुष्कर्म मामले में 6 महीने के अंदर फांसी की सजा का प्रावधान नहीं लाते तब तक अनशन जारी रहेगा।

वहीं, कठुआ में आठ साल की बच्‍ची से दुष्कर्म और हत्‍या के मामले में दिल्ली के क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी आवाज उठाई है। गंभीर ने सोशल मीडिया पर पूछा कि बेटी बचाओ से अब क्या हम दुष्कर्मी बचाओ हो गए हैं?

बता दें कि बृहस्पतिवार को स्वाति मालीवाल ने पीएम मोदी का दुष्कर्म के बढ़ते मामलों पर पत्र लिखकर कई मांगें उठाई थीं। जो इस प्रकार है।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

सादर प्रणाम।

जैसा कि आप जानते हैं कि देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ़ यौन अपराध चरम सीमा पर है। दिल्ली में एक 8 महीने की बच्ची के साथ बर्बरता से दुष्कर्म किया गया। उस मासूम की चीखें अभी भी हमारे ज़हन में गूंजती हैं।

अब कठुआ (जम्मू) में तो हैवानियत की सब हदें पार कर दी गईं हैं। एक 8 साल की बच्ची के साथ 8 दिन तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसके टुकड़े जंगल में फेंक दिए गए। लड़की का कत्ल करते हुए भी उसके साथ उन जानवरों ने बार बार दुष्कर्म किया।

सबसे ज्यादा शर्म की बात यह है कि आरोपी को बचाने के लिए स्थानीय नेता एवं बार एसोसिएशन ने धरने प्रदर्शन किए।

वहीं, उन्नाव में एक नाबालिग के पिता की पुलिस कस्टडी में ‘हत्या’ हो गई, क्योंकि उन्होंने स्थानीय बाहुबली विधायक द्वारा अपनी बेटी के दुष्कर्म के खिलाफ आवाज उठाई थी। आज भी वह आरोपी विधायक मज़े से खुला घूम रहा है। देश भर से ऐसी दिल दहलाने वाली खबरें लगातार आ रही हैं।

दिल्ली महिला आयोग पिछले ढाई साल से आपसे गुहार लगा रहा है कि देश में एक ऐसा सिस्टम बनाएं, जिसमें जो भी छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म करे, उसे 6 महीने में फांसी की सज़ा दी जाए।

इस मांग के लिए देश भर से 5.5 लाख पत्र इकट्ठा करके भी हमने आपको भिजवाए थे, पर मैं बहुत दुख महसूस करती हूं कि इस मामले में कुछ नहीं हुआ। क्या इन बेटियों का दर्द सच में आप महसूस नही कर पा रहे? क्या ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ सही में आपके लिए कोई मायने नहीं रखता? दिल्ली पूरे विश्व में दुष्कर्म की राजधानी के नाम से बदनाम है। क्या इस बात की आपको ज़रा भी चिंता नही है?

पत्र में स्वाति ने आगे लिखा है- आज आप देश के लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए एक दिन का अनशन कर रहे हैं। लेकिन देश का लोकतंत्र कैसे सुदृढ़ होगा, अगर महिलाएं और बच्चियां लुटती रहेंगी? मैं आपसे अपील करती हूं कि आप अपने अनशन के दौरान उस 8 महीने की दिल्ली की बच्ची, 8 साल की कठुआ की लड़की और उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता और उनके स्वर्गवासी पिता के बारे में ज़रूर सोचें।

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